
शिमला जिले में पिछले कई सालों से चिट्टा तस्करी का नेटवर्क चला रहे शाही महात्मा मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि चिट्टे की तस्करी आर और एम कोड से होता था। इससे पता चलता था कि चिट्टे की सप्लाई किस शख्स को होनी है। पुलिस के मुताबिक शाही महात्मा के इस पूरे नेटवर्क को मांटा और रांटा नाम के दो शख्स चला रहे थे। पैकेट में अंकित एम और आर के नाम का कोड यह दर्शाता था कि चिट्टे की सप्लाई रांटा को होनी है या फिर मांटा को।
वहीं रोहड़ू और जुब्बल समेत आसपास के क्षेत्रों में चिट्टे की तस्करी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। इसके बाद पुलिस ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की मदद ली। दोनों एजेंसियों ने जांच शुरू की तो शाही महात्मा के बारे में पुख्ता सुबूत मिले। 18 सितंबर को पुलिस और एनटीएफ को गुप्त सूचना मिली कि जम्मू-कश्मीर से मुद्दसीर अहमद नाम का शख्स चिट्टे की बड़ी खेप लेकर शिमला आ रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने कोटखाई के समीप टैक्सी को रोका और आरोपी की तलाशी ली। इस दौरान आरोपी की तलाशी लेने पर गुप्तांग के पास करीब 468 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। इसकी बाजार में कीमत करीब 19 लाख रुपये के करीब थी। मामले की जांच में पता चला कि शाही महात्मा के इशारे पर ही चिट्टे की यह खेप रोहड़ू के लिए भेजी जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने शाही महात्मा उर्फ शशी नेगी को गिरफ्तार किया। इसके बाद इस गिरोह के करीब 26 सदस्यों को पुलिस सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां होंगी। पुलिस की इस ताबतोड़ कार्रवाई से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जिले में नशे का यह खेल खत्म होगा और युवा पीढ़ी को इस दलदल में गिरने से बचाया जा सकेगा।
शाही महात्मा के मुख्य सहयोगी को पुलिस ने गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। अभी तक की जांच में छह से सात करोड़ रुपये की चिट्टा तस्करी के सुबूत मिले हैं। मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होंगी। पुलिस नशा तस्करों को किसी हाल में नहीं बख्शेगी- संजीव कुमार गांधी, पुलिस अधीक्षक, शिमला
